Kagaz Ke Tukray | Hindi Poem | Bed Time Poem | Nursery Rhymes | Kids Songs!

Kagaz Ke Tukray | Hindi Poem | Bed Time Poem | Nursery Rhymes | Kids Songs कोने में पड़े ये कागज़ के टुकड़े कुचले से, मुरझाए से ये कागज़ के टुकड़े अतीत की किताब से निकले ये कागज़ के टुकड़े जिनपर यादों की स्याही बिखरी पड़ी है मेरे ज़ेहन मे कुछ चेहरे, जो कभी पास थे, कभी साथ थे उनकी बस यादें ही पड़ी है मै इन टुकड़ों को कभी-कभी खोल कर देख लेता हूँ उनमे क़ैद लम्हों को पढ़ लेता हूँ, जी लेता हूँ, इनको अपने सीने से लगा लेता हूँ धुंधली पड़ती स्याही को फिर से लिखने की कोशिश करता हूँ थोड़ा सुकून मिलता है और थोड़ा ग़म भी जो खो गए है, भूल गए है, बदल गए है वो इन पन्नों पर वेसै ही है जैसे मुझे मिले थेKagaz Ke Tukray | Hindi Poem | Bed Time Poem | Nursery Rhymes | Kids Songs कोने में पड़े ये कागज़ के टुकड़े कुचले से, मुरझाए से ये कागज़ के टुकड़े अतीत की किताब से निकले ये कागज़ के टुकड़े जिनपर यादों की स्याही बिखरी पड़ी है मेरे ज़ेहन मे कुछ चेहरे, जो कभी पास थे, कभी साथ थे उनकी बस यादें ही पड़ी है मै इन टुकड़ों को कभी-कभी खोल कर देख लेता हूँ उनमे क़ैद लम्हों को पढ़ लेता हूँ, जी लेता हूँ, इनको अपने सीने से लगा लेता हूँ धुंधली पड़ती स्याही को फिर से लिखने की कोशिश करता हूँ थोड़ा सुकून मिलता है और थोड़ा ग़म भी जो खो गए है, भूल गए है, बदल गए है वो इन पन्नों पर वेसै ही है जैसे मुझे मिले थे?.